स्टॉक मार्केट मे ट्रेडिंग कैसे करे - How to set stop loss in stock market
अब जब आपको ट्रीट लेना आ जाएगा तब आपको स्टॉपलॉस लगाना भी सीखना होगा क्योंकि अगर आपको स्टॉपलॉस लगाना नहीं आता है या गलत नहीं लगाएंगे तो आपको ज्यादातर डॉट ही होगा। इस थे ग्रेट लेना सीखने साथियों को स्टॉपलॉस लगाना भी सीखना होगा। इसके साथ ही ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का एक कंसेप्ट है जिसमें हम अपने दोस्त को चेंज करते रहते हैं। जरुर लीजिएगा। इस सबको प्रॉफिट होने के चांसेस बढ़ जाएंगे।
How to set stop loss
अब जब आपको देख लेना आ गया, स्टॉपलॉस लगाना आ गया और आपने ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाने का तरीका भी सीख लिया। तब आपको जरूरत टेक्निकल ही आपको समझाएगा। किक्रेट देना कब है अब टेक्निकल एसएस करने के लिए आपको चार्ट देखने होते हैं तो चार्ट देखने के लिए बहुत सारी वेबसाइट है जो मैं हूं।
Tradingview.com आप चाहे तो कोई भी वेबसाइट यूज कर सकते हैं। इस वीडियो में कुछ भी स्पॉन्सर्ड नहीं है जो मैं खुद यूज करता हूं। वही आपको बता रहा हूं। अब ट्रेडिंग क्योंकि वेबसाइट में जाने के बाद चार्ट को ओपन करने का इंटेक्स का चार्ट आप देखना चाहते हैं। उसका नाम आप सर्च कर सकते हैं और इस तरह से उसका चार्ट ओपन हो जाएगा। अब आपको चार्ट ओपन करना आ गया है तो अब शुरुआत होती है।
टेक्निकल एनालिसिस सबसे पहली चीज जो हमको सीखनी है वह सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस ब्लॉक करना प्राइस। सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस को बहुत हद तक फॉलो करती है। अगर किसी शेयर की प्राइस अपने सपोर्ट के पास है तो बहुत ज्यादा चांस होते हैं की बात शेयर की प्राइस नीचे नहीं गिरेगी और ऊपर ही जाएगी तो आप सपोर्ट के पास कर सकते हैं और जब शेयर की प्राइस अपने रजिस्टेंस के पास होती है तो वहां पर ज्यादा चांस होते हैं कि वहां से प्रीत ऊपर नहीं जाएगी तो आप वहां पर चल कर सकते हैं।
बट ट्रेडिंग में ऐसा कोई भी तरीका नहीं है तो हमेशा काम करता है जिससे इसके साथ आपको स्टॉपलॉस और अदर स्टेट जी कभी यूज करना होगा। सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस के ऊपर हमने अपने तीनों बना रखी है तो आप उस वीडियो को देख सकते हैं। उसका लिंक डिस्क्रिप्शन पर दिया गया है जब आपको सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस का कंसेप्ट समझ आ जाएगा। तब आपको ट्रेंडलाइन ड्रॉ करना सीखना होगा। ट्रेंडलाइन भी जब मार्केट अपडेट इंडिया डाउन ट्रेन में होता है, उसमें सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस की तरह ही काम करती है।
आपने कुछ भी सुनाओ का ट्रेन है जो फ्रेंड एंड ट्रीटमेंट जिसका मतलब होता है कि जब तक ट्रेन चेंज नहीं होता है तब तक आपको पेशेंस रखना चाहिए और अगर ट्रेन से हो जाता है। एग्जिट कर लेना चाहिए। इसके बाद और कल तक जो आपको सीखना है वह प्राइस वॉल्यूम टेंट प्राइस का मतलब तो आपको बताइए तो सीधा बोलूंगा। मतलब जानते हैं।
बीड़ी का अंदाजा कॉन्फिडेंट लगाओ एक्सपीरियंस मोटर ट्रेडिंग ऑन करो करते हैं करते हैं। किसी भी तरह की फीडिंग करता है। टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए आप इंडिकेटर उसका यूज़ कर सकते हैं इंडिकेटर्स पैटर्न।
चाट के ऊपर कुछ पैटरनिया डिजाइन से बनते हैं जो कि प्राइस वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट की मैथमेटिकल कैलकुलेशन करके किए जाते हैं और इनका यूज चार्ट में अप्लाई करने के बाद मार्केट का ट्रेंड और सिग्नल पता करने के लिए किया जाता है। यानी अगर आप यह पता करना चाहते हैं कि मार्केट किस डायरेक्शन में जा रहा है या फिर मार्केट बाय सिग्नल दे रहा है। यार सिग्नल दे रहा है। इंडिकेटर्स का यूज करके पता कर सकते हैं। इसके अलावा और भी तरीके हैं लेकिन आज की वीडियो में हम इंडिकेटर की बात करेंगे तो आप इंडिकेटर्स का यूज करके मार्केट का ट्रेन और जब आप ट्रेनर सिग्नल को समझ जाते हैं तब आप इन को यूज करके प्रिंट कर सकते हैं। किस शेयर की प्राइस ऊपर जाएगी या नीचे जाएगी और जब आपको पता होगा कि शेयर की प्राइस किस डायरेक्शन में जाएगी उस हिसाब से टिकट प्रॉफिट।
आज की post में मैं आपको बहुत सारे इंपॉर्टेंट इंडिकेटर उसके बारे में समझा जा रहा हूं और उसके बाद अब यह प्रोडक्ट कर पाएंगे कि शेयर की प्राइस किस डायरेक्शन में जाएगी तो इस वीडियो को ध्यान से देखिएगा तो चलिए सबसे पहले यह समझते हैं कि इंडिकेटर्स कितने टाइप के होते हैं तो दोनों इंडिकेटर उसको बहुत तरह से कैटिकाइज किया जा सकता है। इसमें पहला तरीका है। उनकी पोजीशन के बेसिस पर कैटिगराइज करना। इसमें दो तरह के इंडिकेटर इंडिकेटर साथ हैं जो कि चाट के ऊपर प्लॉट किए जाते हैं जैसे कि पोलिंग जब एंड मूविंग एवरेज इन चाट के ऊपर बनते हैं, इसलिए कहा जाता है और दूसरा है।
ऑस्किलेटर इसमें इंडिकेटर आता है जोकि प्राइस के ऊपर या नीचे प्लॉट किए जाते हैं। एग्जांपल ए आर एस आई एम एस ई डी और लॉजिस्टिक ऑफिस लेट हो। इंडिकेटर को लीडिंग इंडिकेटर्स के बेस पर भी कैटेगरी किया जा सकता है। लीडिंग इंडिकेटर होते हैं जो कि प्राइस की मूवमेंट होने से पहले ही सिग्नल दे देते हैं और लेगिंग इंडिकेटर। इसकी मूवमेंट होने के बाद सिग्नल देते हैं
। बहुत सारे ट्रेडिंग इंडिकेटर उसको यूज़ लेस बताते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। इनकी भी बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि ट्रेंड एक्चुअल में रिवर्स हुआ है या नहीं या इंडिकेटर से यूज करके कंफर्म कर सकते हैं।
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